Ram Avatar

कौन हैं वह राम जिनके ध्यान में शिव लीन रहते हैं, जिनके नाम को जीवन के अंत में सत्य कहा जाता है, क्यों कहा जाता हैं, राम से बड़ा राम का नाम ?

विष्णु के सातवें अवतार राम को उकेरने के पहले उन्हें जब जानने का प्रयास किया तो यही सब प्रश्न उठे। तब महसूस हुआ, यह नाम एक दर्पण की तरह है, जितना उसके भीतर झाँका जाए उतना ही हमारे भीतर का सच उजागर होता जाता है।

राम शब्द का उपयोग वेदों में किया गया है, विष्णु अवतार दशरथ पुत्र राम के पहले। अतः राम परम ब्रह्म हैं, जो चेतना के रूप में हर जीव में विद्यमान हैं । राम शब्द का अर्थ होता है रमना,‘रमते योगितो यास्मिन स राम:’

यानी योगीजन जिसमें रमण करते हैं वही राम हैं।ब्रह्मांड के जो कण कण में है शाब्दिक अर्थ में वही राम है।

निराकार ब्रह्म जब मर्यादा, करुणा और धर्म का जीवंत आदर्श बन कर मनुष्य रूप लेता है तब वह राम कहलाता है।

राम नाम साधना भी है और साध्य तक पहुँचने का मार्ग भी।

तुलसीदास की एक बड़ी सुन्दर पंक्ति है – राम-नाम-मनि-दीप धरु, जीह देहरी द्वार।

तुलसी भीतर बाहिरौ, जौ चाहसि उजियार॥

वे कहते हैं कि यदि तुम अपने मन के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रकाश चाहते हो, तो राम-नाम रूपी मणि वाले दीपक को अपनी जीभ रूपी देहरी पर रख लो। जिस प्रकार घर की देहरी पर दीपक रखने से घर के अंदर और बाहर दोनों और उजाला हो जाता है, उसी प्रकार जीभ पर हमेशा राम नाम का स्मरण रखने से जीवन का हर कोना रोशन हो जाता है।

Project Details

  • Acrylic on Canvas

  • 60 / 36inches

  • Year 2026