Vaman Avatar
ईश्वर चमत्कारिक रूप से हमारे सामने प्रकट हो, यह ज़रूरी नही बल्कि मुमकिन है कि वह एक साधारण रूप में कभी भी सामने आ जाएँ। कभी-कभी जो छोटा और नगण्य प्रतीत होता है, वही अनंत शक्ति का स्रोत हो सकता है।विष्णु के पांचवें अवतार वामन की कथा इस बात की पुष्टि करती है।
कथा कहती है कि तीनों लोकों के एक राजा थे, बली। अत्यंत दानी, पराक्रमी और धर्मनिष्ठ, लेकिन उनके भीतर अपनी शक्ति और उपलब्धियों का सूक्ष्म अहंकार भी था। तब विष्णु ने बौने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे तीन पग भूमि मांगी। वामन ने दो पगों में समस्त पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया, और तीसरे पग के लिए जब स्थान न बचा तब बली ने अपना सिर अर्पित कर दिया।प्रतीकात्मक रूप में इसका अर्थ है कि ईश्वर की प्राप्ति तभी संभव है जब अहंकार का समर्पण हो जाए।
यहाँ पहला पग, भौतिक संसार और संपत्ति पर अधिकार का प्रतीक है दूसरा पग,मन, विचार और भावनाओं पर अधिकार का और तीसरा पग,अहंकार का ।
अतः आध्यात्मिक मार्ग में अंतिम चरण वस्तुओं का त्याग नहीं, बल्कि अहंकार का त्याग माना जाता है।
Project Details
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Acrylic on Canvas
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Round 30" diameter
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Year 2026




