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वराह अवतार विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है।पुराणों के अनुसार दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों में डुबो दिया था, जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने विशाल वराह का रूप धारण किया,उन्होंने महासागर में प्रवेश करके पृथ्वी को उठाया और सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया। इसके बाद हिरण्याक्ष के साथ युद्ध हुआ, जिसमें वराह ने असुर का वध किया।
आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में अगर देखा जाए, तो पृथ्वी का डूबना मनुष्य की चेतना का अज्ञान, भय और मोह में डूब जाना है, हिरण्याक्ष, अहंकार, लालच और भौतिक आसक्ति का प्रतीक है,वराह रूप, चेतना का, जो गहरे पतन में भी उतरकर आत्मा को ऊपर उठाती है।पृथ्वी को उठाना, आत्मज्ञान, संतुलन और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।
Project Details
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Acrylic on Canvas
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Round 30" diameter
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2026




