Narsimh Avatar

विष्णु के चौथे अवतार, नरसिम्ह अवतार मनुष्य के भीतर चलने वाले आंतरिक संघर्ष और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है। हिरण्यकशिपु कहीं बाहर नहीं वह

 

हमारे ही भीतर के क्रोध, लोभ, अहंकार, ईर्ष्या का रूप है और प्रहलाद अटूट श्रद्धा और आत्मसमर्पण का प्रतीक हैं। नरसिम्ह जो न पूरी तरह मनुष्य हैं, न पूरी तरह सिंह, संकेत है कि परम सत्य हमारी तर्कसंगत सीमाओं और परिभाषाओं से परे है।

 

इस अवतार में कथा के रूप में यह बताया गया है कि जब साधक के भीतर श्रद्धा दृढ़ होती है, तब दिव्य चेतना उसके अहंकार और अज्ञान का नाश करके उसे सत्य की ओर ले जाती है।

Project Details

  • Acrylic on Canvas

  • Round 36" diameter

  • Year 2026