Living for others

Living for others

Chapter 7 Insight 1, 2

इस सूत्र में लाओत्से अहंकार से मुक्त होने की बात कहते हैं। प्रकृति शास्वत है, क्योंकि उसे अपने होने का पता नही, आकाश नित्य है क्योंकि वह दूसरों के लिये है। अत: जबतक अहंकार है, हमें सारे जगत का केंद्र खुद में लगता है। जबकि शास्वत जीवन हमें तभी उपलब्ध हो सकता है जब दूसरों के लिये जीना शुरू हो पाए। यह तभी संभव है जब कोई दूसरा न रह जाए। लाओत्से के अनुसार अहंकार घटनाओं का एक क्रम है, और सजग हो कर इसे कहीं से भी तोड़ दिया जाए तो घटना अभी टूट सकती है। ज्ञानी अपनी उपस्थिति के प्रति उदासीन रहते है, और इसलिए सबसे पीछे रहते हैं, मिटने को तैयार। लाओत्से कहते हैं जिसने असुरक्षा और भय को अंगीकार कर लिया, अमृत उसकी उपलब्धि है।

 

स्वर्ग और पृथ्वी दोनों ही शास्वत हैं, क्योंकि ये स्वार्थ सिद्धि के लिए नही जीते, तभी इनकी निरंतरता संभव होती है। इस कारण ज्ञानी भी अपने व्यक्तित्व को पीछे रखते हैं, फिर भी वे सबसे आगे होते हैं। वे अपने अस्तित्व की उपेक्षा करते हैं, पर उनका प्रभाव सुरक्षित रहता है। चूंकि उनका अपना कोई स्वार्थ नहीं होता, इसलिए उनके लक्ष्यों की पूर्ति होती है।

 

Heaven is long enduring and earth continues long. The reason heaven and earth are able to endure is because the do not live of or for themselves. Therefore sages keep their individuality behind yet they are always in the forefront. They ignore their own existence yet their power remains secure. Since they have no selfish motive, their goals are fulfilled.

Project Details

  • Acrylic on Canvas

  • Round 36" diameter

  • Year 2025