Insight – 2
अस्तित्व अनाम है, नाम देते ही वस्तु का जन्म हो जाता है। जबतक नाम नही दिया गया हो तबतक प्रत्येक वस्तु असीम अस्तित्व का अंग होती है,जैसे ही नाम दिया, अलग हो जाती है।
जहां अस्तित्व है वहां विपरीत के भेद गिर जाते हैं और एक का ही विस्तार हो जाता है। जहां नाम दिया, द्वैत का निर्माण हो जाता है। इसलिए ईश्वर को हम नाम नही दे सकते क्योकि नाम देते उसका वस्तु हो जाना तय है। नाम देते चेतना वस्तु बन जाती है और बिना नाम दिए अचेतन वस्तु भी चैतन्य हो जाती है।
अपने दूसरे सूत्र में लाओत्से अस्तित्व को दो हिस्सो में बांट कर समझाते हैं। स्वर्ग से तात्पर्य अनुभव या चेतना का है और पृथ्वी से अर्थ है पदार्थ । समस्त चैतन्य और पदार्थ का मूल स्रोत है चैतन्य यानी अनाम, और समस्त वस्तुओं की जननी है नाम देने की प्रक्रिया।
लाओत्से शब्दहीन अनुभूति की संभावना की बात कह रहे हैं जहां शब्द के साथ वस्तुओं का जगत आ जाता है और शब्द के हटते ही वस्तुओं का जगत हट जाता है, अस्तित्व मात्र रह जाता है।
2nd Sutra :
The nameless is the beginning of heaven and earth
The name is the mother of myriad creatures.
अनाम ही पृथ्वी और स्वर्ग का जनक है
नामधारी ही सभी पदार्थों की जननी है।
Project Details
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Acrylic on Canvas
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66 X 36 inches
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Year 2024