Be like water
Be like water, Chapter 8 Insight 1, 2, 3
लाओत्से कहते हैं श्रेष्ठता व्यक्ति के स्वभाव से होती है, किसी भी बाहरी कारणों से या उसकी उपलब्धियों या संपदा से नहीं। तो प्रश्न उठता है श्रेष्ठता क्या होती है?
वे कहते हैं, परम श्रेष्ठता जल सदृश होती है, क्योंकि जल का स्वभाव ताओ के बिल्कुल निकट है। उसकी महानता सभी चीज़ों का पोषण करने में और विनम्रता में है। यह सूत्र ताओ को पानी के रूपक से दर्शाता है, यह उन नीची जगहों में उतरने से भी संतुष्ट है जिसका लोग तिरस्कार करते हैं। पानी स्वाभाविक रूप से निचले स्थानों की तलाश करता है, जो विनम्रता और सादगी का प्रतीक है। इसी तरह ज्ञानी ध्यान आकर्षित नही करते, निष्पक्ष और अहंकार रहित हो ज़मीन से जुड़े रहते हैं।
आवास की श्रेष्ठता स्थान की उपयुक्तता में है। मन की श्रेष्ठता, मौन में है। संसर्ग की श्रेष्ठता पुण्यात्माओं के साथ रहने में है। शासन की श्रेष्ठता सुव्यवस्था में है।कार्य की श्रेष्ठता कर्म की कुशलता में है। पानी के गुणों को अंगीकार कर श्रेष्ठता इसी में है कि जो भी उपलब्ध हो, वह परम भाव से स्वीकार हो, न कोई विरोध हो, न शिकायत हो, हर क्षण ईश्वर के अनुगृहित हो।
The highest good is like water.
Water gives life to numerous things and doesn’t strive. It flows in places men reject and so is tao.
In dwelling, be close to the land.
In meditation, go deep in the heart.
In dealing with others, be gentle and kind. In speech, be true. In ruling, be just. In daily life, be competent. In action, be aware of time and season. No fight, no blame.
Project Details
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Acrylic on Canvas
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Round 36" diameter
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Year 2025




