Transcending knowledge: Universal Harmony
Transcending knowledge: Universal Harmony
Chapter 3 Insight 3
जो जानते हैं, वे लोगों को कोरे ज्ञान से मुक्त रखने का प्रयास करते है। लाओत्से कहते हैं, कि वे जानते हैं कि लोगों के भटकने का सुगमतम मार्ग जानकारी है। उपनिषद में भी एक सूत्र है कि अज्ञानी तो अंधकार में भटक ही जाते हैं, ज्ञानी महा अंधकार में भटक जाते हैं। जिसे कुछ पता नही उसे अहंकार को निर्मित करने का कोई आधार नही होता। धन या पद भी अहंकार को उतना मजबूत नही करता जितना ज्ञान करता है।
लाओत्से का कहना है कि जानकारी जानने से रोक देती है क्योंकि जानकारी उधार होती है, किसी दूसरे के सत्य का अनुभव। ज्ञान उधार नही हो सकता। वह तो भीतर से जन्मता है, बाहरी संग्रह की तरह इकठ्ठा नही होता, वह चेतना की तरह विकसित होता है, हमें रूपांतरित करता है। ज्ञान और ज्ञानी में फर्क नही होता। जानकारी को आचरण बनाना पड़ता है,और ज्ञान आचरण बन जाता है। जो असत्य है वह गिर जाता है, सत्य बच जाता है।
जो जानते हैं वह लोगों को जानकारी से इसलिए बचाएंगे ताकि वह स्वयं जानने की दुनिया में प्रवेश कर सके। जानकारी जानने वाले को मजबूत करती है और ज्ञान जानने वाले को विलीन कर देता है। लाओत्से कहते हैं कि वे उन्हें कोरे ज्ञान और इच्छादि से मुक्त रखने का प्रयास करते हैं, क्योंकि इच्छाएं सिर्फ संसार की ही नही, मोक्ष की भी होती है। इच्छा संसार है, इच्छा में होना संसार में होना है, बंधन है, तनाव है, और वे उनको तनाव से मुक्त करते हैं। इच्छारहित का अर्थ है वर्तमान में होना। जब अक्रियता की ऐसी अवस्था उपलब्ध होती है, तब जो सुव्यवस्था बनती है वह सार्वभौम है। ज्ञान कोई क्रिया नही अवस्था है।
He constantly tries to keep them without knowledge and without desire, and where there are those who have knowledge, to keep them to pursuing to act on it. When there is this abstinence from action, good order is universal.
Project Details
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Acrylic on Canvas
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18 by 23 inches
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Year 2025